Munshi Premchand Biography In Hindi – मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय

Munshi Premchand

हिन्दी के महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद(Munshi Premchand) का जम्म वाराणसी जिले के लमही नामक एक छोटे से गाव मे 1890 मे हुआ था |

प्रेमचंद के पिता का नाम अजायबराय तथा माँता का नाम आनन्दी देवी था | प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपतराय था |आप का बचपन कठिनाईयों तथा धनाभाव मे जीवन को जी रहे थे

मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय

मुंशी प्रेमचंद की शिक्षा– एंटरेंस परीक्षा पास करने जरूरी था और math उनको बहुत जटिल लगता था, जब वह inter मे पड़ रहे थे तभी 15 की उम्र मे इनकी शादी हो गई, प्रेमचंद अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद शिक्षक के रूप मे work करने लगे उनकी तबीयत ठीक न होने के कारण आपने शिक्षक के work को छोड़ दिया

प्रेमचंद महात्मा गांधी से प्रभावित हो कर अपने सरकारी नौकरी को छोड़ दिया और आंदोलन मे कूद पड़े |(munshi premchand biography in hindi)

प्रेमचन्द्र की प्रमुख पुस्तके

सरकारी नौकरी करते समय ही प्रेमचंद ने सोजे वतन नामक पुस्तक लिखी। देशभक्ति सम्बन्धी इस रचना के रचना के कारण के बड़े संकट में पड़ गये थे। आरंभ में आप उर्दू में लिखते थे किन्तु फिर हिंदी में रचनाएं करने लगे। आपने मर्यादा नामक पत्रिका का सम्पादन किया। डेढ़ वर्ष पश्चात आप काशी विद्यापीठ चले गए और वहां प्रधान अध्यापक बन गए।

यहां कुछ दिन काम करने के बाद आपने माधुरी पत्रिका का सम्पादन किया। आपने अपना प्रेस खोला तथा हंस और जागरण नामक पत्र निकालें। इससे आपको बहुत हानि उठानी पड़ी। इसके बाद आपने मुम्बई में एक फिल्म कम्पनी में नौकरी कर ली। स्वास्थ्य खराब होने के कारण आप अपने गांव लौट आए, जहां लम्बी बिमारी के बाद सन् 1936ई में आपका निधन हो गया।

Premchand Ka Sahityik Parichay (प्रेमचन्द्र का साहित्यिक परिचय)

प्रेमचंद एक महान साहित्यकार थे | कहानी लेखन की प्रतिभा उनमे जन्मजात थी पहले वे उर्दू मे नवाब राय के नाम से कहानिया तथा उपन्यास लिखते थे बाद मे महावीर प्रसाद  दिवेदी की से प्रभावित होकर हिन्दी मे लेखन आरम्भ किया | उन्होने अपना   साहित्यिक नाम प्रेमचंद रखा |

प्रेमचंद की सोतेवतन नामक क्रांतिकारी रचना से अंग्रेज सरकार को बगावत की ‘बू’ आई। उस समय वह सरकारी मुलाजिम थे

प्रेमचंद की यह रचना सरकार ने जप्त कर ली वितरण से शेष बची प्रतियां जिला कैलेंडर को सौंपने के बाद बड़ी कठिनाई से प्रेमचंद इस संकट से बच सकें प्रेमचंद ने सतत साहित्य साधना करते हुए लगभग एक दर्जन उपन्यास 300 से अधिक कहानियों की रचना की।(Premchand biography in Hindi)

प्रेमचंद को हिंदी के उपन्यास तथा कहानी रचना की जन्मदाता माना जाता है प्रेमचंद से पूर्व हिंदी का कथा साहित्य पूर्णता है कपोल कल्पित निराधार बातों का चित्रण करता था

प्रेमचंद के आने से इस क्षेत्र में युगांतर उपस्थित हुआ प्रेमचंद ने अपनी कहानियों तथा उपन्यासों के कथानक तथा पात्र वास्तविक जगत से जुड़े तथा कथा साहित्य को भटकाव से निकालकर यथार्थ की भूमि पर खड़ा किया।

प्रेमचंद सच्चे अर्थ में जनता के कथाकार थे कहानयों तथा उपन्यास को प्रेमचंद्र ने जनता की भाषा में प्रस्तुत किया उनकी भाषा पर गांधीजी की हिंदुस्तानी भाषा का प्रभाव है

प्रेमचंद की कहानियों में विविधता है तथा उनमें सामान्य जनजीवन के चिन्ह मिलते हैं ।( Munshi Premchand biography in Hindi) प्रेमचंद को साहित्य में एक आदर्श स्थान दिया गया है।

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मुंशी प्रेमचंद की रचनाएं (Munshi Premchand Ki Rachnaye)

मुंशी प्रेमचंद
मुंशी प्रेमचंद

प्रेमचंद हिंदी में उपन्यास तथा कहानी साहित्य को यथार्थ के धरातल पर स्थापित करने वाले प्रथम साहित्यकार थे।

यद्यपि वे मूलतः कहानी कार तथा उपन्यासकार थे, किन्तु उन्होंने निबंध, नाटक इत्यादि विधाओं पर भी सफलतापूर्वक लेखनी चलायी है। आपकी प्रमुख कृतियां अग्रलिखित हैं

उपन्यास

  • सेवासदन
  • निर्मला,प्रतिज्ञा
  • कर्मभूमि
  • रंगभूमि
  • गोदान
  • गबन इत्यादि

कहानी-संग्रह

  • नवनिधि
  • प्रेरणा
  • कफन
  • प्रेम प्रसून
  • प्रेम पचीसी
  • प्रेम चतुर्थी
  • सप्त सरोज
  • सप्त सुमन
  • प्रेम- गण
  • अग्नि समाधि
  • कुत्ते की कहानी
  • मन मोदक मानसरोवर इत्यादि।

नाटक– संग्राम, प्रेम की वेदी ,तथा रूठी रानी।

निबंध संग्रह– कुछ विचार

जीवन चरित्र– कलम तलवार और त्याग दुर्गादास महात्मा शेखसादी।

अनुदित– अहंकार ,’टाल्सटाय की कहानियां , सुखदास‌ , आजाद -कथा , चांदी की डिबिया और सृष्टि का आरम्भ ।

Premchandra Ki Bhasha- Shailly

भाषाप्रेमचंद की भाषा सरल तथा बोधगम्य है गांधीजी उस समय एसी भाषा के पक्षपाती थे, जो जनता की समझ में आसानी से आ सकें। इसका नाम उन्होंने हिन्दुस्तानी रखा था।

प्रेमचंद्र ने अपने साहित्य के लिए इस प्रकार की भाषा को अपनाया था यह सरल भाषा है । (Munshi Premchand ka jivan Parichay) मुंशी प्रेमचंदजी की प्रतिनिधि भाषा है

प्रेमचंद्र की यह भाषा सजीव तथा व्यवसायिक है प्रेमचंद्र जी ने संस्कृत के प्रश्न शब्दों वाले भाषा का प्रयोग भी अपने साहित्य में किया है परंतु अधिक नहीं किया प्रेमचंद्र की अधिकांश रचनाएं सरल जन भाषा में ही लिखी मिलती है ।(Munshi Premchand biography in Hindi)

मुंशी प्रेमचंद एक महान लेखक है

शैली– प्रेमचंद की रचनाओं में वर्णनात्मक सरस शैली के दर्शन होते हैं उसमें विषयानुरूप परिवर्तन के आप सदैव पक्षपाती रहे हैं आपकी शैलियों में आपके व्यक्तित्व की स्पष्ट झलक दिखाई देती है प्रेमचंद्र ने अपने साहित्य में निम्नलिखित शैलियों का प्रयोग किया है|

वर्णनात्मक– इस शैली का प्रयोग किसी वस्तु,सरल, घटना इत्यादि के वर्णन के लिए किया गया है
मनोविश्लेषणात्मक- पात्रों के मानसिक भाव तथा अत्यधिक का चित्रण करने के लिए लेखक ने किस शैली का प्रयोग किया है।

Munshi Premchand ka jeevan aur unke jivan mein ghati sari ghatnaye aapke samne humne prastut kar diya hai.

भावात्मक शैली- कहानियां तथा उपन्यासों के मध्य पात्रों के मन की भावनाओं का चित्रण भावात्मक शैली में किया गया है इसमें भाषा संस्कृत निश्ड प्रभावपूर्ण तथा काव्यात्मक है जैसे जो कुछ होना था वह कहां हुआ मां बाप ने बेटे का सहारा कहां देखा।

भावात्मक शैली- कहानियां तथा उपन्यासों के मध्य पात्रों के मन की भावनाओं का चित्रण भावात्मक शैली में किया गया है इसमें भाषा संस्कृत निश्ड प्रभावपूर्ण तथा काव्यात्मक है जैसे जो कुछ होना था वह कहां हुआ मां बाप ने बेटे का सहारा कहां देखा।

विवेचनात्मक शैली- गंभीर विचारों को प्रकट करने के लिए लेखक ने इस शैली को अपनाया है इस शैली में संस्कृत निष्ठ भाषा का प्रयोग किया गया है।

हास्य व्यंग्यात्मक शैली– वर्णन तथा पात्रों की मन स्थिति के चित्रण के मध्य यंत्र तंत्र हास्य के छींटे भी लेखक ने छोड़े हैं कहीं-कहीं सामाजिक विषमताओं पर करारा व्यंग भी करने से वह नहीं चुके हैं। यह एक महान साहित्यकार थे

Munshi Premchand का हिंदी साहित्य में स्थान

प्रेमचंद ने अपने साहित्य में भारतीय समाज की समस्याओं का प्रभावशाली तथा यथार्थ चित्रण किया है उनके पात्रों का चरित्र तथा कथावस्तु किसी उच्च आदर्श से प्रेरित है उनकी कहानियों तथा उपन्यासों की पृष्ठभूमि यथार्थ पर आधारित है

लेकिन उनका उद्देश्य आदर्शवादी है उनकी रचनाओं में समाज के सभी वर्गों के प्रति प्रेम का चंद्र उदय होता प्रतीत होता है वह हिंदी के युगांत कारी कथाकार है।

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आपने क्या सीखा

आज हमने आपको Munshi Premchand Biography (मुंशी प्रेमचंद के जीवन परिचय) के बारे में बता दिया है और साथ ही उनके साहित्यिक परिचय और उनकी रचनाओं के बारे में बता दिया है और प्रेमचंद भाषा शैली को आपको विस्तार से बताया है इसलिए आपको अगर यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो हमारी पोस्ट को शेयर कीजिए ताकि लोग लोगों को हमारी पोस्ट से फायदा मिल सके ऐसे ही नई अपडेट पाने के लिए हमें सब्सक्राइब कर लीजिए धन्यवाद।

















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