मुहावरे और लोकोक्तियां अर्थ और वाक्य प्रयोग सहित

हिंदी मुहावरे और लोकोक्तियाँ भाषा को सशक्त एवं प्रभावशाली बनाने के लिए मुहावरे(idioms) और लोकोक्तियां(Proverbs) का इस्तेमाल वार्तालाप के बीच में किया जाता है. कई बार केवल मुहावरे व लोकोक्तियां के कथन से ही बात शीशे की तरह स्पष्ट हो जाती है

आपके साथ कभी ना कभी ऐसा जरूर हुआ ही होगा. जब बुजुर्ग हमारे बीच कुछ ऐसा कथन कह कर चले जाते हैं जिसे समझना मुश्किल हो जाता है वह बात आप के पल्ले नहीं पड़ते हैं।

पल्ले नहीं पढ़ना‘ यह भी एक मुहावरा(Idiom) ही हैं. हम आज ऐसे ही अनेकों दिलचस्प मुहावरे और लोकोक्तियाँ Idiom in Hindi लेकर आए हैं

जिसे पढ़कर आप अत्यंत प्रसन्न होंगे और आपको मुहावरे और लोकोक्तियां के बारे में जानकारी भी प्राप्त होगी

इस पोस्ट से पहले हमने दिलचस्प रोचक तथ्य के बारे में बताया था आप लोगों ने उन्हें बेहद पसंद किए. और अपने दोस्तों के साथ शेयर भी किए ऐसे ही प्यार आप इस JankariYa Blog पर बनाए रखें. आप सभी को इसके लिए तहे दिल से धन्यवाद करते हैं

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मुहावरा किसे कहते हैं

जिन वाक्यांशों का सामान्य या शाब्दिक अर्थ ना होकर एक विशेष अर्थ होता है वह ‘मुहावरा‘ कहलाते हैं जैसे आंख चुराना दिल टूटना आदि मुहावरे वाक्यांश होते हैं इसलिए वे स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं कराते हैं इनका प्रयोग वाक्य के अंग के रूप में ही हो सकता है मुहावरों के प्रयोग से भाषा में चमत्कार आ जाता है

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लोकोक्तियां किसे कहते हैं

लोकोक्तियां का अर्थ हैं लोक में प्रचलित कथन जैसे धोबी का कुत्ता घर का ना घाट का काला अक्षर भैंस बराबर आदि लोग तीनों का प्रयोग विशेष और व्यापक अर्थों में होता है यह जनसाधारण के अनुभव किसी कहानी घटना अथवा तथ्य पर आधारित होती हैं इनका प्रयोग किसी विचार के समर्थन में होता है जिससे कथन प्रभावशाली हो जाता है यह प्रायः स्वतंत्र वाक्यों की भांति प्रयुक्त होती हैं लोग तीनों को कहावत भी कहते हैं

मुहावरे और लोकोक्तियां में अंतर

मुहावरे वाक्यांश होते हैं जबकि युक्तियां स्वतंत्र कथन है मुहावरों का प्रयोग वाक्य में ही होता है किंतु लोग तीनों का प्रयोग प्रायः स्वतंत्र कथन के रूप में होता है मुहावरों का प्रयोग भाषा में चमत्कार उत्पन्न करने के लिए होता है परंतु लोग क्यों का उपयोग चमत्कार के अतिरिक्त किसी बात के कथन के लिए भी होता है

Muhavare in hindi (मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग)

मुहावरे

1. अंकुश रखना(दबाव में रखना)– अंकुश ना रखने पर बच्चे बिगड़ जाते हैं।

2.अंग-अंग ढीला होना ( बहुत थक जाना)- लगातार के इस सफर ने मेरा अंग अंग ढीला कर दिया है

3. अंगूठा दिखाना ( अपेक्षा पूर्वक इनकार करना)- राम ने मोहन को अंगूठा दिखाते हुए कहा मैं तुम्हें अपनी पुस्तक नहीं दूंगा तुम मेरा क्या बिगाड़ लोगे?

4. आंख चुराना ( कतरा जाना) – जब राम ने ऋण लिया है वह अपने मित्र से आप चुराता है।

5. अंधे की लाठी होना ( एकमात्र सहारा)- श्रवण कुमार अपने माता पिता के लिए अंधे की लाठी के समान था।

6. अक्ल पर पत्थर पड़ना ( कुछ ना सूझना)- साक्षात्कार की तैयारी तो बहुत की थी लेकिन प्रश्न सुनते ही जाने क्यों अक्ल पर पत्थर पड़ गए।

7. आग लगाना (झगड़ा कराना)- राम और श्याम कल से झगड़ रहे हैं लगता है किसी चुगलखोर ने यह आग लगाई है।

8. आसमान सिर पर उठाना ( बहुत शोर करना)- अध्यापक के ना होने के कारण छात्रों ने आसमान सिर पर उठा रखा है।

9. आपे से बाहर हो ना ( क्रोध को बस में ना रखना)- इंद्रजीत की मृत्यु का समाचार सुनकर रावण आपे से बाहर हो गया।

10. ईट का जवाब पत्थर से देना ( समान व्यवहार करना)- जब पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण किया तब भारत ने भी ईट का जवाब पत्थर से दिया।

11. ईद का चांद होना ( बहुत दिनों बाद दिखाई पड़ना)– इतने दिन कहां थे? तुम तो ईद के चांद हो गए।

12. कलई खुलना( पोल खोलना)– हरि बहुत चोर बाजारी करता है आजकल आई अवश्य खुल जाएगी।

13. कायापलट जाना ( बहुत बड़ा परिवर्तन हो जाना)- वैज्ञानिक आविष्कारों के कारण आज संसार की काया पलट गई है।

14. चैन की बंसी बजाना ( सुख से जीवन बिताना)- परीक्षा खत्म होते ही मोहन चैन की बंसी बजा रहा है।

15. चार चांद लगाना ( प्रतिष्ठा बढ़ाना)- भारतीय वैज्ञानिकों ने परमाणु परीक्षण करके देश की प्रतिष्ठा में चार चांद लगा दिए।

16. चिकना घड़ा (कुछ भी असर ना होना)- मोहन तो चिकना घड़ा है उस पर सच्चे उपदेश का कुछ भी प्रभाव पड़ता है।

17. जान के लाले पड़ना ( प्राणों पर संकट आना)- भारतीय सेना द्वारा सत्र की सेना को घेर लेने पर उनको अपनी

18. नौ दो ग्यारह होना ( भाग जाना)- पुलिस को देखते ही चोर नौ दो ग्यारह हो गया।

19. फूला ना समाना ( बहुत प्रसन्न होना)- इंडिपेंडेंस कप में भारत की विजय सुनकर हम सभी फूले न समाए।

20. अपना उल्लू सीधा करना ( अपना स्वार्थ सिद्ध करना)- सोहन मुझसे झूठ बोल कर अपना उल्लू सीधा करके चलता बना।

21. अपने पांव में आप कुल्हाड़ी मारना ( अपना ही नुकसान करना)- पढ़ने का समय व्यर्थ नष्ट करके हम अपने पांव में आपने ही कुल्हाड़ी मारते हैं।

22. आकाश चूमना ( बहुत ऊंचा होना)- आज दिल्ली में अनेक नई इमारतें आकाश चूमती दिखाई देती हैं

23. गड़े मुर्दे उखाड़ना ( बेकार की पुरानी बातें उखाड़ना)- जो हुआ सो हुआ अब झगड़ा बंद करो गड़े मुर्दे उखाड़ने से क्या लाभ।

24. घोड़े बेचकर सोना ( गहरी नींद सोना)- परीक्षा सिर पर आ जाने पर भी वह ऐसे सोता है मानो घोड़े बेच कर सो रहा है।

25. चल बसना ( मर जाना)- मेरे मित्र के पिताजी कल अचानक ही चल बसे।

26. आंखें पथरा जाना ( प्रतीक्षा करते करते थक जाना) – मित्र का इंतजार करते करते मेरी आंखें पत्र पत्र आ गई परंतु वह नहीं आया।

27. आंखों में खटकना ( बुरा लगना)- वह कैलेंडर मेरी आंखों में खटक रहा था इसलिए मैंने उसे उस जगह से हटा दिया।

28. घी के दिए जलाना (खुशियां मनाना)- राम के वनवास से लौटने पर अयोध्या वासियों ने घी के दीए जलाए थे

29. चकमा देना( धोखा देना) – चोर पुलिस को चकमा देकर भाग गया।

30. जहर का घूंट पीना ( विवश होकर गुस्से को दबा लेना)- अपने पुत्र के परीक्षा में फेल हो जाने पर उसके पिता जहर का घूंट पीकर रह गए।

31. झख मारना ( व्यर्थ समय गंवाना)- मैं अपने मित्र की प्रतीक्षा में वही बैठक शक मारता रहा परंतु वह नहीं आया।

32. पौ बारह होना ( अत्यधिक लाभ होना)- आजकल चीनी की कमी होने से बाजार में दुकानदारों के पांव बाहर हो गए।

33. माथा ठनकना (संदेह होना)- वह दवा पीर पर ही बेहोश हो गया सीसी में दवा का रंग देखकर ही मेरा माथा ठनका था।

34. माथे मढ़ना (इच्छा के विरुद्ध जिम्मेदारी सौंपना) -साहब ने यह फाइल मेरे माथे मढ़ दी है बताओ अब मैं क्या करूं

35. छक्के छुड़ाना (घबराहट पैदा कर देना)- युद्ध के मैदान में भारत ने पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दिए।

36. हाथ पांव फूल जाना ( घबरा जाना) – हथियारबंद डाकुओं को देखकर सेठ जी के हाथ पांव फूल गए।

37. पेट मैं चूहे कूदना ( भूख लगना)- मैं सुबह से पढ़ रहा हूं अब तो मेरे पेट में चूहे कूद रहे हैं।

38. पीठ दिखाना (मैदान छोड़कर भाग जाना)- राजपूत लोग युद्ध में कभी पीठ नहीं दिखाते थे

39. पानी पानी होना ( लज्जित होना)- मैच में हार जाने पर पाकिस्तानी टीम पानी पानी हो गई।

40. फूला ना समाना ( बहुत प्रसन्न होना)- परीक्षा में प्रथम आने का समाचार सुनकर महेंद्र फूला ना समाया।

41. दांत खट्टे करना ( हरा देना)- भारतीय सेना ने पाकिस्तान की सेना के दांत खट्टे कर दिए।

42. प्राणों की बाजी लगाना ( मरने को तैयार होना)- देश की स्वतंत्रता के लिए देश प्रेमियों ने प्राणों की बाजी लगा दी थी।

43. हिलोरे माना (मन में खुशी होना)-परीक्षा में प्रथम श्रेणी प्राप्त करने पर मेरा मन खुशी से हिलोरे मारने लगा।

44. लोहा लेना (युद्ध करना)- राणा प्रताप ने राष्ट्रीय भावना से प्रेरित होकर अकबर से लोहा ले लिया था।

45. कलेजा पक जाना (अत्यंत दुखी हो जाना)- हर समय के लड़ाई झगड़े से मेरा कलेजा पक गया है।

46. जी जान से जुट जाना ( बहुत परिश्रम करना)- परीक्षा में प्रथम श्रेणी पाने के लिए सोहन जी जान से जुट गया है।

47. अपना सा मुंह लेकर रह जाना (लज्जित होना)-मैंने आज श्याम से ऐसी लगने वाली बात कही कि वह अपना सा मुंह लेकर रह गया ।

48. अपने मुंह मियां मिट्ठू बनना ( अपनी प्रशंसा स्वयं करना) भले आदमियों को अपने मुंह मियां मिट्ठू बनना शोभा नहीं देता।

49. आडे हाथों लेना (बुरा भला कहना)- राम के पिता ने आज घड़ी खो देने के कारण उसे आड़े हाथों लिया।

50. आग बबूला होना (अत्यधिक क्रोधित होना)- कमजोर आदमी जरा सी बात पर आगबबूला हो जाना

51. आंख दिखाना (धमकाना)-बच्चे आंख दिखाने से ही ठीक काम करते हैं

52. गुड गोबर करना (बना काम बिगाड़ देना)- आपने यहां आकर साला गुड गोबर कर दिया।

53. खेत रहना (मारा जाना)- दूसरे महायुद्ध में सभी देशों के हजारों सिपाही खेत रहे।

54. छाती मूंग दलना (कष्ट देना)- मैंने आपका क्या बिगाड़ा है जो आप बराबर में छाती पर मूंग दल रहे हैं।

55. कलम तोड़ना (अधिक श्रेष्ठ लिखना)- सूरदास ने वात्सल्य रस के वर्णन में कलम तोड़ दी है।

56. कुत्ते की मौत मरना (बहुत कष्ट पाकर मरना)- पापी मनुष्य कुत्ते की मौत मरते हैं।

57. कच्ची गोलियां खेलना (अनाड़ी होना)- बिना पढ़े हुए किसी कागज पर हस्ताक्षर करना कच्ची गोलियां खेलना है।

58. दंग रह जाना (हैरान होना)- उसकी बातें सुनते ही मैं दंग रह गया।

59. दिल पसीजना (दया जाना)- भिखारी की दीन दशा देख कर मेरा दिल पसीज गया।

60. दृष्टि को बांध लेना (अपनी ओर आकर्षित कर लेना)- सीता जी के आदित्य सुंदर ने समस्त राजाओं की दृष्टि को बांध लिया।

61. अंगारे उगलना ( क्रोध में कठोर वचन बोलना)- अपमानजनक शब्दों को सुनकर वह अंगारे उगलने लगा।

62. अंग अंग मुस्कुराना ( बहुत प्रसन्न होना)- खुशी का समाचार सुन उसका अंग अंग मुस्कुरा उठा।

63. मक्खियां मारना (निकम्मे में रहकर समय बिताना)- काम ना होने के कारण सोहन आजकल मक्खियां मार रहा हैं।

64. प्रलय ढानां(विनाश करना)- कुरुक्षेत्र के युद्ध में वीर अभिमन्यु ने कौरवों की सेना पर प्रलय ढा दी।

65. बाल बांका न होना (कुछ हानि ना होना)- जिसकी भगवान रक्षा करता है उसका कोई बाल बांका नहीं कर सकता।

66. बेतरह टूट पड़ना (बड़े जोर से आक्रमण करना)- भारतीय सेना पाकिस्तानी सेना पर बेतहर टूट पड़ी।

67. मुंह छिपाना ( बचना)- किताब चुराते हुए पकड़े जाने पर सुरेश अब मुंह छिपा रहा है।

68. रोग पालना ( बुरी आदत डालना)- किसी को उधार देने का रोग नहीं पालना चाहिए।

69. आंख का तारा होना (बहुत प्रिय होना)- प्रत्येक पुत्र अपनी मां की आंखों तारा होता है

70. श्री गणेश करना (आरंभ करना)- मैंने आज अपनी पढ़ाई का श्रीगणेश कर दिया है।

71. लोहे के चने चबाना (कठिन काम करना)- देश में भ्रष्टाचार को मिटाना लोहे के चने चबाना है।

72. लकीर का फकीर होना (पुरानी प्रथा पर चलना)- भारतीय किसान आज भी लकीर का फकीर बना।

73. पीठ दिखाना ( हार मानना)- कायर लोग हमेशा पीठ दिखाकर युद्ध में मैदान छोड़कर भाग जाते हैं

74. रंग में भंग होना (खुशी में रज होना)- वर्ग के बेहोश होते ही विवाह में रंग में भंग हो गया।

75. टेढ़ी खीर होना (कठिन काम होना)- राजनीतिक दांव पेज समझाना टेढ़ी खीर है।

76. दाल में काला होना ( कुछ शक हो ना) – आने का वादा करके भी सुरेश नहीं आया लगता है दाल में कुछ काला है।

77. नाको चने चबाना (बहुत परेशान होना)- एक दिन मुकेश के कारण तुम्हें नाकों चने चबाना पड़ेगा।

78. पत्थर की लकीर होना ( दृढ़ होना)- मैंने जो कुछ कहा है आप उसे पत्थर की लकीर समझिए।

79. आकाश पाताल एक करना ( अत्याधिक प्रयास करना)- पंडित जवाहरलाल नेहरू ने विश्व शांति के लिए आकाश पाताल एक कर दिया था।

80. दाल ना गलना ( वश ना चलना)- आपकी डालनी यहां नहीं गलेगी अतः आप यहां से चुपचाप चले जाएं।

81. कलेजे पर सांप लोटना (अत्यधिक ईष्र्या होना)- अपने पड़ोसी की उन्नति देखकर उसके कलेजे पर सांप लोटने लगा।

82. पांचो अंगुलियां घी में होना ( लाभ ही लाभ होना) – व्यापार तो चमका ही था लाटरी भी निकल आई अब तो उसकी पांच अंगुलियां घी में हैं।

83. भीगी बिल्ली बनना ( सामना करने से डर जाना)- वह अपनी बहुत से ही मारता था मेरे ललकार ने पर वह भीगी बिल्ली बन गया था।

84. खून पसीना एक करना (कठिन परिश्रम करना)- भारतीय किसान खेती करने में अपना खून पसीना एक कर देते हैं ।

85. दांतो तले उंगली दबाना (आश्चर्य प्रकट करना)- सर्कस में बंदर को ताल पर साइकिल चलाते देख कर सारे लोगों ने दांतों तले उंगली दबा ली

86. नमक मिर्ची मिलाना (बढ़ा चढ़ा कर कहना)- आजकल समाचार पत्र भी साधारण सी बात को नमक मिर्च लगाकर प्रकाशित करते हैं

87. अक्ल चक्कर आना(कुछ समझ में ना आना)- परीक्षा में कठिन प्रश्नों को देखकर मेरी अक्ल चकराने लगीं।

88. अक्ल का दुश्मन होना (मूर्ख हो ना)- रमेश की समझ में कुछ नहीं आएगा क्योंकि वह तो अक्ल का दुश्मन है

89. अक्ल पर पत्थर पड़ना (बुद्धि से काम लेना)- बुरा काम करने से पूर्व तुमने क्यों नहीं सोचा क्या तुम्हारी आंख में घास चरने गई थी।

90. आंखें दिखाना (गुस्सा करना)- राम कि आप इसमें तो एक ना चली घर आकर आंखें दिखाने लगी।

91. अपने पैरों पर खड़ा होना (आत्मनिर्भर होना)- तकनीकी ज्ञान प्राप्त करके मनुष्य अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है।

92. घाव हरा करना (पुरानी दुख को ताजा करना)- उसकी मृत्यु की याद दिला कर आपने मेरा घाव हरा कर दिया।

93. दांत पीसकर रह जाना (क्रोध करके रह जाना)- बाबू की अनुचित बातें सुनकर प्रधानाचार्य जी दांत पीसकर रहेंगे।

94. चांद पर थूकना (निष्कलंक व्यक्ति पर दोष लगाना)- गांधीजी की देशभक्ति के विषय में थोड़ी भी शंका करना चांद पर थूकना है।

95. सब्ज बाग दिखला ना(झूठा लालच देना)- आजकल नेता लोग जनता को सब्जबाग दिखाकर ही वोट मांगते हैं।

96. लोहा मानना (हार मानना)- अंत में जापान को अमेरिका का लोहा मानना ही पड़ा।

97. गुलछर्रे उड़ाना (मौज करना)- वह ससुराल का पैसा पाकर गुलछर्रे उड़ा रहा है कोई काम तो करता नहीं।

98.खाक छानना (मारे- मारे फिरना)- मैंने उसके लड़के के लिए सारे इलाके की खाक छान डाली पर वह नहीं मिला।

99. बगुला भगत होना (ढोंगी होना)- श्याम कुमार से बच कर रहना वह पूरा बगुला भगत है।

100. उलटी गंगा बहाना (नियम विरुद्ध कार्य करना)- तुम अमीर होकर भी बेईमानी करते हो अरे यह उल्टी गंगा क्यों रहते हो?

लोकोक्तियां

1. अंधा बांटे रेवड़ी फिर फिर अपने को दे– स्वार्थी व्यक्ति अधिकार पाने पर अपनों को ही सहायता करता है राम जिला जब से मैनेजर बने हैं मील में सारी नियुक्तियां उनके लोगों की ही हुई है मुझे भला वहां नौकरी क्यों मिलने लगी अंधा बांटे रेवड़ी फिर फिर अपने को दे।

2. अंधे के हाथ बटेर लगना- (अनायास मनचाही वस्तु मिलना) पढ़ने में वह बहुत कमजोर था बहुत थोड़ा कोर्स करके भी वह प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हो गया अंधे के हाथ बटेर लग गई।

3. अंधों में काना राजा – जहां सभी मूर्ख हो वह कम बुद्धिमान वाला ही बुद्धिमान माना जाता है रामजीलाल ही इस गांव में थोड़ा पढ़ा लिखा है गांव के लोग इससे ही सलाह लेते हैं सच ही अंधों में काना राजा।

4. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता- एक आदमी कुछ नहीं कर सकता आप अकेले क्या प्रचार कार्य करेंगे अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता अतः आप भी चुप बैठिए।

5. अपनी- अपनी ढपली अपना- अपना राग- (मतभेद होना) अपनी अपनी चलाना भाई हमारे यहां तो सभी अपनी- अपनी ढपली अपना- अपना राग अलापने रहते हैं।

6. आगे नाथ न पीछे पगहा – (किसी प्रकार का अंकुश ना होना।)- उसके मां-बाप तो है नहीं उसकी जो इच्छा होती है वह करता है ऐसा क्यों ना हो उसके आगे नाथ ना पीछे पगहा है।

7. आ बैल, मुझे मार- ( जबरदस्ती आफत मोल लेना )-स्वयं पढ़ने पढ़ाने का कार्य ही काफ़ी है। तुम्हें क्या कहने की जरूरत थी कि तुम टाइप भी अच्छा कर लेते हो अब तो तुम्हें टाइप भी करना पड़ेगा तुमने तो वही किया कि आ बैल मुझे मार।

8. उल्टा चोर कोतवाल को डांटे- (अपराधी निर्दोष पर दोष लगाएं।)- एक तो तुमने अपनी कार से मेरी साइकिल तोड़ दी ऊपर से हरजाना वसूल करना चाहते हों।

9. आंख के अंधे और नाम नैनसुख- (गुण के विपरीत नाम होना) -घर में छादम नहीं है, नाम है करोड़ीमल। यह तो ऐसा हुआ कि आंख के अन्धे अौर नाम नैन सुख।

10. आम के आम गुठलियों के दाम- (दोहरा लाभ उठाना। )-मैं अखबार पढ़ता हूंफिर उसे रद्दी में बेच भी लेता हूं इस तरह आम के आम गुठलियों के दाम हो जाते हैं।

11. अपनी करनी पार उतरनी – कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है पड़ोसी को कारागार में देखकर आश्चर्य क्यों करती हो आप नहीं जानते हैं कि अपनी करनी पार उतरनी होती है।

12. ऊंट के मुंह में जीरा- (खाने की वस्तु का आवश्यकता से बहुत कम होना)- शेर को छोटा मैम ना खाने के लिए देना ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।

13. ऊंची दुकान फीका पकवान- (बाहरी आडंबर होना )-उनका नाम बहुत सुना था, लेकिन उनके भाषण में कोई तत्त्व न था। वहां ऊंची दुकान फीका पकवान वाली बात थी।

14. एक म्यान में दो तलवार- एक चीज पर दो व्यक्तियों का अधिकार नहीं रह सकता। जब से कम्पनी में दो साझेदार हों गये है कम्पनी में गुटबंदी हों गई है।।ठीक भी है,एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकतीं।

15. एक पन्थ दो काज- ( एक साथ दो लाभ प्राप्त करना। )-परीक्षा भी दें आयेंगे और दिल्ली भी देख आयेंगे एक पन्थ दो काज हो जायेंगे।

16. काला अक्षर भैंस बराबर-( अनपढ़ होना )- उसे पुरस्कार में किताबें क्यों दे रहे हो? उसके लिए तो काला अक्षर भैंस बराबर है।

17. एक अनार सौ बिमार- (एक वस्तु के सैकड़ों ग्राहक )- गांव में पंचायती धर्मशाला एक ही है, परंतु शादी वाले कई है। किस-किस को दिया जाए, यहां तो एक अनार सौ बिमार हैं।

18. एक और एक ग्यारह होते हैं- मेल से शक्ति बढ़ जाती है सभी को मिलकर देश की उन्नति में सहयोग देना चाहिए क्योंकि एक और एक ग्यारह हो जाते हैं।

19. कहां राजा भोज, कहां गंगू तेली- (दो व्यक्तियों की स्थिति में बहुत अंतर )- रामसिंहपुरा ने जमीदार हैं सोहनलाल से उनका क्या मुकाबला कहां राजा भोज कहां तेली।

20. खग जाने खग ही की भाषा- समान प्रकृति के लोग एक दूसरे की बात समझते हैं आपस में बात कर लेते हैं दूसरा उनके संकेतों को समझ भी नहीं सकता। खग जाने खग ही की भाषा।

21. खोदा पहाड़ निकली चुहिया- (अधिक प्रयास का थोड़ा )- ट्यूशन पढ़ने और रात दिन परिश्रम करने के बाद भी उसे तृतीय श्रेणी ही मिली खोदा पहाड़ निकली चुहिया।

22. गरीबी में आटा गीला-( विपत्ति पर विपत्ति आना ।)-उसे 2 माह से वेतन नहीं मिला आज साइकिल चोरी हो चली गई इसे कहते हैं गरीबी में आटा गीला।

23. घर की मुर्गी दाल बराबर- सुलभ वस्तु की कदर नहीं होती मैं भी डॉक्टर हूं पर पिताजी अपने स्वास्थ्य के विषय में वैध जी से ही परामर्श करते हैं मुझे कुछ नहीं पूछते हैं हो भी क्यों न, घर की मुर्गी दाल बराबर जो होती है।

24. घर का भेदी लंका ढाये- आपसी फूट भयानक होता है। जयचंद गोरी से मिल गया इसलिए राजपूतों की हार हुई। सच हैं, घर का भेदी लंका ढाए।

25. चोर की दाढ़ी में तिनका- अपराधी स्वयं शक्ति रहता है। मैंने तुम पर तो दोस्त लगाया नहीं तुम क्यों सफाई देने लगे मालूम होता है कि तुम ही ने मेरी पुस्तक चुराई है चोर की दाढ़ी में तिनका।

26. चिराग तले अंधेरा-( अपनी बुराई दिखाई न देना। )-न्यायालयों में ही अधिक रिश्र्वत चलतीं है सच हैं, चिराग तले अंधेरा होता है।

27. चोली दामन का साथ- (परस्पर घनिष्ठ प्रेम होना ।)- मैं तुम्हें सुधीर के साथ हमेशा देखता हूं लगता है कि तुम दोनों का चोली दामन का साथ है।

28. चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात- ( थोड़े समय का सुख )- पिता की कमाई पर थोड़े दिन और राज कर लो।बाद में 4 दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात होगी ही।

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इसके साथ ही अब मज़ेदार मुहाबरो की कड़ी को समाप्त करते हैं हम आशा करते हैं कि आपको हिंदी मुहावरे और लोकोक्तियाँ के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हो गई होगी अगर आपको अर्थ और वाक्य प्रयोग सहित पूरी जानकारी प्राप्त हो गई है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में बताइए अगर आपका कोई सवाल है तो हमसे पूछे हम आपके सवाल का जवाब देने का प्रयास करेंगे।

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