सिकन्दर और पोरस की प्रेरणादायक कहानी हिंदी में

प्रेरणादायक कहानी: आज हम मन के हारे हैं, हार मन के जीते जीत, इस बात पर चर्चा करेंगे और पोरस और सिकंदर के एक “प्रेरणादाई कहानी“(Inspiration Story) के बारे में चर्चा करेंगे

जिससे आपको हमेशा हमेशा के लिए प्रेरणा मिल जाएगी और किसी से प्रेरणा लेने की जरूरत नहीं होगी।

सिकंदर और पोरस

मन के हारे हार है मन के जीते जीत

सिकंदर ने बंदी पोरस से पूछा, तुम्हारे साथ कैसा व्यवहार किया जाए? पोरस ने निर्भीक वाणी में उत्तर दिया, जैसा एक राजा दूसरे राजा के साथ करता है।

धन्य है पोरस! वह अजेय हैं. सिकंदर ने पोरस के शरीर को जीत लिया मन को नहीं पोरस का मन अभी भी नहीं हारा है सिकंदर पोरस के इस अजेयमान के सामने झुक जाता है

पोरस हार कर भी जीत जाता है क्योंकि मन के हारे हार है मन के जीते जीत,।

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मन को एकाग्र कैसे करें, मन को शांत कैसे करें

मानव मननशील प्राणी है उसकी समस्त क्रियाओं का मूल आधार उसका संचालन और नियामक उसका मन है

शरीर से मनुष्य से भी संबंध जोड़ता है वह सब मन की भावनाओं पर आधारित होते हैं

मनुष्य जो भी ज्ञान प्राप्त करता है आविष्कार करता है दांवपेच चलता है सब उसकी मनन शक्ति का परिणाम है मनुष्य अपनी इच्छाओं के अनुरूप जो भी कार्य करता है वह सब उसके मन से प्रेरित होते हैं

विश्व को हम जैसा मान लेते हैं वह हमें वैसा ही लगता है और हम वैसा ही व्यवहार करते हैं

तभी तो सूर की गोपियों ने कहा था उधर मन माने की बात मन के इस केंद्रीय भूमिका के संबंध में कठोपनिषद में एक रूप प्रस्तुत किया गया है मन की शक्ति का स्रोत है मन हमारे क्रियाकलाप का आधार है

केंद्र बिंदु से आधार निर्बल होगा तो उस पर कुछ भी दृढ़ता से स्थिर नहीं होगा

इसलिए हमारे संचालन केंद्र मन का सशक्त होना परम आवश्यक है मन सशक्त है तो हमारा हर प्रयत्न सब रत्न होगा वस्तुतः मन की शक्ति ही मनुष्य की सच्ची सकती है

कविवर हरिऔध जी की निम्न पंक्तियां जो सुदृढ़ मन वालों के प्रति कही गई हैं-

पर्वतों को काटकर सड़के बना देते हैं वे।, सैकड़ों मरूभुमि में नदियां बहा देते हैं वे।, गर्भ में जल राशि के बेड़ा चला देते हैं वे |, जंगल में भी महाजंगल रचा देते हैं वे !

कविवर हरिऔध जी

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मन को दृढ़ बनाने के लिए कुछ उदाहरण प्रस्तुत करते हैं

विश्व में जितने भी महान कार्य हुए हैं उन सबके मूल में मन की अजेय दृढ़ता छुपी रही है जितने भी महान पुरुष हुए हैं सब मन की दृढ़ता के बल पर ही हुए हैं

महाभारत के प्रसिद्ध युद्ध में कौरवों की विशाल वाहिनी को पांडव किस बूते पर परास्त कर सके मन की शक्ति के बूते पर

  • दृढ़ चित्र और अजय अमन वाले राम ने वानर को ही एकत्र करके प्रतापी लंकापति रावण को पराजित किया
  • महाराणा प्रताप ने महान मुगल सम्राट अकबर की नींद हराम कर दी थी.
  • सुभाष चंद्र बोस ने अंग्रेजों के सिंहासन को हिला दिया था !
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इनके मन अजीत है मन की शक्ति थी ऐसे ही बाजी मन से निकले थे यह शब्द-

गाजिया में बू रहेगी तब तक ईमान की !

तख्ते लंदन तक चलेंगी हिंदुस्तान की।

मन अपराजेय कैसे बनें?

शक्ति स्वत: नहीं मिल जाती है उसके लिए प्रयास करना होता है अभ्यास करना होता है साधना करनी होती है

मन की शक्ति के लिए भी मानसिक साधना की आवश्यकता होती है तभी मन की शक्ति मिलती है

जो निज मन परिहरै विकारा। तो अंत दे्त जनित संसृति दुःख संशय शोक अपारा

सचमुच जिसका मन बलवान होता है उसके लिए कुछ संभव नहीं होता है क्योंकि- ‘मन के हारे हार है, मन के जीते जीत

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