राष्ट्रीय एकता पर निबंध प्रस्तावना सहित हिंदी में

Essay On Nationality in Hindi (राष्ट्रीय एकता पर निबंध)

राष्ट्रीय एकता पर निबंध #1

प्रस्तावना- प्राचीन काल में जब देश में राष्ट्रीय एकता की कमी हुई तभी देश संकट में पड़ा. विदेशी आक्रमणकारी सिकंदर से एक पृथ्वी राज चौहान को मोहम्मद गौरी से पराजित होना पड़ा और देश से पहले यूनानी तथा बाद में इस्लामी शासन स्थापित हुआ

फिर देश अंग्रेजी शासन के चंगुल में फंस गया और भारत माता गुलामी की बेड़ियों से जकड़। दी गई । देश का आर्थिक शोषण हुआ. इस दुर्दशा से महात्मा गांधी आदि देश भक्तों की आत्मा को बहुत कष्ट हुआ और उन्होंने आजादी का बिगुल बजाया राष्ट्रीय चेतना जागृत हुई

राष्ट्रीय एकता स्थापित हुई जिसके परिणाम स्वरुप देश स्वतंत्र हुआ भिन्न-भिन्न प्रदेशों को केंद्रीय शासन सूत्र में पिरो कर राजनीतिक एकता स्थापित की गई परंतु राष्ट्रीय एकता नहीं रह पाई इसके प्रमुख कारण विविध धर्म जाति भाषा और प्रांतीय था आज की भिन्नता आएं हैं

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राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता

राष्ट्रीय एकता पर निबंध
राष्ट्रीय एकता पर निबंध

भारत की एकता उसकी विविधताओं में छिपी हुई है आवश्यकता इस बात की है कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि समझते हुए स्वार्थों का त्याग कर दिया जाए एकता राष्ट्र को शक्ति देती है.

इसके अभाव में राष्ट्र निर्बल होकर टूट जाता है एकता राष्ट्र का प्राण है जब तक वह कायम रहती है राष्ट्र कायम रहता है जब वह टूटती है राष्ट्रीय टूट जाता है राष्ट्र बिखर जाता है

इस संबंध में पंडित जवाहर लाल नेहरू के विचार महत्वपूर्ण हैं हमें समिति संघ के प्रांतीय सांप्रदायिक एवं जातिगत भावना में मन में नहीं रखनी चाहिए क्योंकि हमें बहुत बड़े उद्देश्य को प्राप्त करना है

हमें भारतीय गणतंत्र के नागरिक होने के नाते सीधे खड़े होना है आकाश को आगे पीछे देखना है हमें अपने कदमों को धरती पर मजबूती से जमाना है एवं एकता को भारतीय जनता में उत्पन्न करना है राजनीतिक एकता तो किसी सीमा तक प्राप्त हो चुकी है

किंतु मैं जिस तत्व के पीछे हूं वह इससे कुछ अधिक गहरा है अर्थात देश के लोगों को भावात्मक रूप में एक होना है जिससे हम एकता का निर्माण कर सकें हम सभी विभिन्न नेताओं के होते हुए इस एकता को बनाए रखें

राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के उपाय- सांप्रदायिकता और जातीय भेदभाव एक भयंकर समस्या है इसी ने देश का विभाजन कराया यह आज भी राष्ट्रीय एकता के लिए अभिशाप बनी हुई है.

हमारे देश में अनेक संप्रदाय है जो छोटी-छोटी बातों पर एक दूसरे से लड़ते हैं जी यस गोरी के अनुसार यह जाति प्रेम की भावना ही जो अन्य जातियों में कटुता उत्पन्न करती है और राष्ट्रीयता चेतना के विकास के लिए अनु प्रयुक्त वातावरण तैयार करती है

क्षेत्रीय ताकि भावना बहुत हानिकारक है केवल अपने क्षेत्र के प्रति उनमें निष्ठा होती है भाषावाद भी बहुत हित कर है.

इन समस्याओं का समाधान राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक है हमें स्वार्थ के संग कुछ घेरे से बाहर निकलकर आपसी सद्भाव भाव के साथ एक दूसरे कटकेनी निकट आना चाहिए और सभी के हित के लिए राष्ट्रीय एकता की फिर से स्थापना करनी चाहिए पृथक तावादी आंदोलन का दमन राष्ट्रीय एकता के लिए परम आवश्यक है

अंत जाति एवं अंत प्रदेशिक विभाग भी राष्ट्रीय एकता में सहायक हो सकते हैं अंत प्रदेशिक उत्सव मेला एवं सम्मेलनों के आयोजनों से भी राष्ट्रीय एकता कायम हो सकती है एक राष्ट्रगान एक राष्ट्र ध्वज एक राष्ट्र चिन्ह और राष्ट्रीय पर्व भी राष्ट्रीय एकता के सहायक तत्व है

उप संघार- निष्कर्ष रुप मैं आप कह सकते हैं कि राष्ट्रीय एकता वह संजीवनी बूटी है जो मरणासन्न राष्ट्र की प्राण रक्षा करती है इस की नितांत आवश्यकता है राष्ट्र का निर्माण अनेक बलिदानों तपस्या और साधना से हुआ है

हमें इसकी एकता प्राण प्रण से बनाए रखनी चाहिए हमारे साहित्यकारों कलाकारों धर्म राजनीतिज्ञों आदि का यह परम कर्तव्य है कि वह अपने सर प्रयासों से राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाने में अपना बहुमूल्य योगदान करें। और अपने स्वदेश प्रेम को जन-जन तक पहुचायिये।

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