उत्प्रेरक किसे कहते हैं| प्रकार तथा उदाहरण सहित व्याख्या

उत्प्रेरक

उत्प्रेरक किसे कहते हैं? प्रकार तथा उदाहरण सहित व्याख्या: हेलो दोस्तों आज हम आपके लिए कक्षा 12 के रसायन विज्ञान में से पृष्ठ रसायन में से मुख्य भाग लेकर आए हैं जिसका नाम है उत्प्रेरक और इसको आज हम आपको बताएंगे । एक बार आपको हम बता देते हैं कि इसमें हम आपको क्या -क्या बताएंगे तो चलिए बताते हैं उत्प्रेरक(Catalyst) किसे कहते हैं( utprerak kise kahate hain) तथा इस का सामान्य परिचय, उत्प्रेरक का वर्गीकरण ,उत्प्रेरक वर्धक तथा उत्प्रेरक विष एंजाइम उत्प्रेरक की पूरी व्याख्या करेंगे। इसलिए आप इस पोस्ट पर बने रहिए ध्यानपूर्वक अध्ययन कीजिए।

उत्प्रेरक किसे कहते हैं? Utprerak Kise Kahate Hain

उत्प्रेरक किसे कहते हैं
उत्प्रेरक किसे कहते हैं

उत्प्रेरक वह होता है जो किसी रासायनिक अभिक्रिया को या तो बंद कर दे या उसकी गति को तीव्र कर दे अर्थात किसी भी तरह से परिवर्तित कर दे उसे उत्प्रेरक कहते हैं

उत्प्रेरक का वर्गीकरण( classification of catalysis)

अभिकारकों व उत्प्रेरक की भौतिक अवस्था के आधार पर उत्प्रेरक दो प्रकार के होते हैं।

  • A. समांग उत्प्रेरक(homogeneous catalysis)
  • B. विष मांग उत्प्रेरक (heterogeneous catalysis)

समांग उत्प्रेरक(homogeneous catalysis): आपके मन में यह सवाल हमेशा आता है जब भी उत्प्रेरक बात आती है कि समांग उत्प्रेरक क्या होता है इसे किसे कहते हैं चलिए बताते हैं जब उत्प्रेरक व अभिकारक दोनों की प्रवास्था(Phase) का मान 1 अर्थात p = 1 होता है तब इसे समागं उत्प्रेरक (homogeneous catalysis) कहते हैं।

विषमांग उत्प्रेरक: मेरे दोस्तों जब भी आपके मन में यह सवाल आता है कि उत्प्रेरक किसे कहते हैं तब तुरंत यह सवाल आता होगा विषमांग उत्प्रेरक किसे कहते हैं तथा समांग उत्प्रेरक किसे कहते हैं समांग उत्प्रेरक को हमने ऊपर बता दिया है अब इसमें विष मांग उत्प्रेरक को बताएंगे।

वह अभिक्रियाएं जिसमें अभिकारक व उत्प्रेरक दोनों की प्रावस्थाओं का मान दो या दो से अधिक होता है विष मांग उत्प्रेरक (heterogeneous catalysis) को प्रदर्शित करता है ।

उत्प्रेरण की कार्यविधि के आधार पर

कार्य विधि के आधार पर उत्प्रेरण को चार भागों में बांटा गया है। अब हम आगे आपको उन चारों की परिभाषा सहित सारी चीजों को बताते हैं।

धनात्मक उत्प्रेरण(positive catalysis)- आपको हमने उत्प्रेरक किसे कहते हैं (utprerak kise kahate hain)इसको ऊपर बता ही दिया है अब आपको बारी बारी से हम बताएंगे कि उत्प्रेरक कार्यविधि के आधार पर कितने भागों में बांटा गया है और इनके बारे में विस्तार पूर्वक वर्णन करेंगे चलिए शुरू करते हैं।

जब किसी बाहा पदार्थ की उपस्थिति में अभिक्रिया की गति बढ़ जाती है तो उसे धनात्मक उत्प्रेरण कहते हैं तथा पदार्थ धन उत्प्रेरक कहलाता है।

ऋणात्मक उत्प्रेरण(negative catalysis)- जब किसी बाहृय पदार्थ की उपस्थिति से अभिक्रिया की गति घट जाती है तो उसे ऋणात्मक उत्प्रेरक कहते हैं तथा ऋणात्मक उत्प्रेरण(negative catalysis) कहलाता है।

स्व- उत्प्रेरण( autocatalysis)- किसी रासायनिक अभिक्रिया में बने किसी उत्पाद द्वारा अभिक्रिया की गति बढ़ाना स्व- उत्प्रेरक(auautocatalysi ) कहलाता है तथा ऐसा पदार्थ उत्प्रेरण कहलाता है।

Q&A

Q1. प्रेरित उत्प्रेरण किसे कहते हैं?
उत्तर- प्रेरित उत्प्रेरण में एक रासायनिक अभिक्रिया उत्प्रेरक की तरह कार्य करती है।

Q2.उत्प्रेरक वर्धक किसे कहते हैं?
वे पदार्थ जो स्वत: उत्प्रेरक की तरह कार्य नहीं करते किंतु उत्प्रेरक की सक्रियता बढ़ा देते हैं वर्धक कहलाते हैं वर्धक सामान्यतः विष मांग उत्प्रेरण में प्रयुक्त होता है अर्थात प्रयोग किया जाता है उदाहरण-
1. पेट्रोल के संश्लेषण में Ni\Co उत्प्रेरक के लिए(As2O3) तथा ThO2 वर्धक का कार्य करता है।
2. वनस्पति तेल के हाइड्रोजन द्वारा कठोरी करण में टेल्लूरियम वर्धक का कार्य करता है।
3. एंजाइमों की सक्रियता से एंजाइम या विटामिन बढ़ा देते हैं।

उत्प्रेरक विष (Catalysis Poisones) किसे कहते हैं?

मेरे दोस्तों आप समझ ही गए होंगे उसके नाम से ही उत्प्रेरक विष मतलब नष्ट करने वाला विष के समान यह अभिक्रिया के लिए विष के समान है यह अभिक्रिया के तीव्रता और सक्रियता को घटा देता है कम कर देता है अर्थात नष्ट कर देता है इसे ही उत्प्रेरण विष कहते हैं। उदाहरण-

1. हैबर विधि द्वारा अमोनिया के निर्माण में Co तथा H2S,Fe उत्प्रेरक के लिए विश्व का कार्य करते हैं।
2. हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन से जल का बनना प्लैटिनम से उत्पीड़ित होता है किंतु कार्बन मोनोऑक्साइड प्लैटिनम के उत्प्रेरण क्षमता को नष्ट कर देती है।


उत्प्रेरकों के गुण( properties of catalysts)
1. साम्यावस्था पर प्रभाव- उत्प्रेरक किसी उत्क्रमणीय अभिक्रिया के साम्या स्थिरांक को प्रभावित नहीं करता उत्प्रेरक साम्यावस्था प्राप्त होने में लगने वाले समय को कम कर देता है उत्क्रमणीय अभिक्रिया में सामान्यतः आगे वाली अभिक्रिया का दर बढ़ाता है परंतु उत्पादों का सांद्रण शीघ्रता से बढ़ने के कारण पश्च भी तेज हो जाती है।
2. उत्प्रेरक की सक्रियता- किसी उत्प्रेरक की सक्रियता उसके पृष्ठ क्षेत्रफल पर निर्भर करती है यही कारण है कि बारीक पिसे हुए अथवा कोलाइडी उत्प्रेरक की सक्रियता ठोस उत्प्रेरक से अधिक होती है क्योंकि चूर्ण अवस्था अथवा कोलाइडी अवस्था में उत्प्रेरक का पृष्ठ क्षेत्रफल अधिक होता है।
3. ताप का प्रभाव ( effect of temperature)- प्रत्येक उत्प्रेरक की सर्वाधिक सक्रियता एक निश्चित ताप पर होती है तथा यह ताप उस उत्प्रेरक के लिए अनुकूलतम ताप कहलाता है।

कोलाइडी उत्पेरक की सक्रियता ताप बढ़ाने पर घट जाती है तथा एक निश्चित ताप से अधिक ताप पर कोलाइडी विलियन में स्कंदन हो जाता है तथा कोलाइडी उत्प्रेरक ओं की सक्रियता समाप्त हो जाती है

एंजाइम उत्प्रेरण( enzyme catalysis) किसे कहते हैं?

वह अभिक्रिया जो एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है एंजाइम उत्प्रेरक अभिक्रिया कहलाती है तथा यह प्रकृति एंजाइम उत्प्रेरण कहलाती है।
एंजाइम आ जीवित नाइट्रोजन युक्त अनुभाग के जटिल कार्बनिक योगिक प्रोटोन पदार्थ है जो जीवित कोशिकाओं से प्राप्त होते हैं एंजाइम कोलाइडी विलियन बनाते हैं इसी कारण इनकी रासायनिक सक्रियता बहुत कुछ होती है एंजाइम उत्प्रेरक सामान्यतः जीव रासायनिक अभिक्रियाएं को प्रेरित करते हैं।

एंजाइम उत्प्रेरण के विशेष गुण( Characteristics of enzyme catalysis)

a. प्रकृति- एंजाइम नाइट्रोजन युक्त प्रोटोनीय यौगिक है मूल्यत: अमोनो- अम्लों से बने होते हैं विभिन्न अमीनो- अम्ल पेप्टाइड बंधनों की सहायता से आपस में जुड़ कर पेप्टाइड बनाते हैं।
b. विलेयता- एंजाइम जल में विलय होकर कोलाइडी विलियन बनाते हैं क्योंकि इनका जलीय विलियन कोलाइडी होता है अतः इनका पृष्ठ क्षेत्रफल बहुत अधिक होता है इसी कारण इनकी सक्रियता उच्च होती है एंजाइम की सूचना मात्रा ही उत्प्रेरण के लिए पर्याप्त होती है
c. PH का प्रभाव- प्रत्येक एंजाइम की सक्रियता एक निश्चित PH पर सर्वाधिक होती है तथा यह PH उस एंजाइम के लिए अनुकूलतम PH कहलाती है एंजाइमों की सामान्यतः अनुकूलतम PH 5 से 7 के बीच होता है

d. ताप का प्रभाव- एंजाइम की सर्वाधिक सक्रियता एक निश्चित तौर पर होती है तथा यह ताप सामान्यतः 25 सेल्सियस से 35 सेल्सियस के बीच होता है इससे कम अथवा अधिक ताप पर एंजाइम की सक्रियता घट जाती है बहुत अधिक ताप बढ़ाने पर एंजाइम नष्ट हो जाते हैं बहुत कम ताप पर भी एंजाइम निष्क्रिय हो जाते हैं।

आपने क्या सीखा

इस पोस्ट में हमने आपको उत्प्रेरक किसे कहते हैं (utprerak kise kahate hain) तथा इनके के गुणों को बताया और एंजाइम किसे कहते हैं एंजाइम के बारे में बताया और बाकी सभी चीजों को बताया आपको अगर इसमें से जो कुछ भी ना समझ में आए हो आप कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं और अगर पोस्ट थोड़ी भी पसंद आई हो तो सब्सक्राइब करके और इसे दो लोगों के साथ शेयर जरूर करें जिससे उन्हें भी फायदा हो।

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